नई दिल्ली: NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए Telegram ऐप को 22 जून तक अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब NEET परीक्षा पेपर लीक मामले ने पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी एजेंसियों के अनुसार कुछ Telegram चैनलों के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र, पेपर लीक के दावे और छात्रों से ठगी की घटनाएं सामने आ रही थीं। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि री-एग्जाम से पहले भी इसी तरह की गतिविधियां दोबारा हो सकती हैं। इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया।
क्या है पूरा मामला?
NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। जांच में सामने आया कि कई Telegram चैनल कथित तौर पर प्रश्नपत्र बेचने, फर्जी लीक दिखाने और छात्रों को गुमराह करने में लगे थे। कुछ मामलों में एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पुराने संदेशों को बदलकर “पेपर पहले से मौजूद था” जैसी झूठी कहानियां भी बनाई गईं।
सरकार क्यों हुई सख्त?
सरकार और NTA का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार Telegram का उपयोग संगठित परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा किया जा रहा था। इसी कारण प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से बंद करने और कुछ फीचर्स पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
छात्रों में मिला-जुला असर
एक तरफ कई छात्रों और अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे पेपर लीक और अफवाहों पर रोक लग सकती है। वहीं दूसरी ओर लाखों सामान्य Telegram यूजर्स को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे करोड़ों सामान्य यूजर्स प्रभावित हुए हैं।
NTA की चेतावनी
NTA ने छात्रों और अभिभावकों को साफ चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं करा सकता। एजेंसी ने छात्रों से अपील की है कि वे Telegram या सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही सही मानें।
निष्कर्ष
NEET-UG 2026 री-एग्जाम अब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन गया है। Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध सरकार का बड़ा दांव है। अब देखना होगा कि यह कदम पेपर लीक माफिया पर कितना असर डालता है और लाखों छात्रों का भरोसा वापस ला पाता है या नहीं।
